गरियाबंद
तेंदुए से बहादुरी से लड़कर अपने चार साल के पोते को मौत के मुंह से खींच लाने वाले 65 वर्षीय दर्शन नेताम को आज जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया. दादा की डेयरिंग: घर से बच्चे को मुंह में दबाकर ले जा रहा था तेंदुआ,दादा ने जान पर खेलकर पोते की बचाई जान
कोठीगांव निवासी दर्शन नेताम ने बीते मंगलवार को अपने पोते को तेंदुए के हमले से बचाया था. नलकूप में स्नान कर रहे दादा ने जैसे ही पोते को तेंदुआ उठाकर ले जाते देखा, वे 100 मीटर तक तेंदुए के पीछे दौड़े और उस पर कूद पड़े. इस साहसिक प्रयास से तेंदुआ बच्चे को छोड़कर भाग गया. बच्चे की गर्दन पर तेंदुए के दांतों के निशान पाए गए हैं, लेकिन उसकी जान बच गई.
इस अदम्य साहस के लिए कलेक्टर भगवानू उइके और डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने दर्शन नेताम को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया. कलेक्टर ने उन्हें “शेर से कम नहीं” बताते हुए ग्रामीणों से वन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने और हिंसक वन्य प्राणियों से दूरी बनाए रखने की अपील की है.
अंकित प्रयागराज राजिम के निवासी हैं और पूर्व राजपत्रित अधिकारी मुरली मनोहर थवानी के सुपुत्र हैं. प्रशासन ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अन्य युवाओं को भी उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया.
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