रायपुर: तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम निरतू के प्रगतिशील किसान श्री भुखन लाल और श्री रामाधार साहू की मेहनत और नई तकनीकों को अपनाने की सोच आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। पहले वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे आय सीमित थी। लेकिन समेकित उद्यानिकी विकास योजना के तहत उद्यानिकी विभाग से मिले मार्गदर्शन ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी।
श्री भुखन लाल ने अपने 2 हेक्टेयर खेत में कटहल एवं नींबू के पौधे लगाए और साथ ही अंतरवर्ती फसल के रूप में बैंगन की खेती शुरू की। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट खाद, ड्रिप सिंचाई और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। इन तकनीकों से जहां फसल की लागत कम हुई, वहीं उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि बैंगन का लगभग 425 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। जहां लागत 2.5 से 3 लाख रुपये आई, वहीं उन्हें 5 से 6 लाख रुपये तक की आय हुई। इस सफलता से उनकी आर्थिक स्थिति में स्पष्ट सुधार आया और वे अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

इसी प्रकार ग्राम अमोलीकापा के किसान श्री रामाधार साहू ने भी उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की है। पहले वे परंपरागत खेती करते थे, लेकिन अब आधुनिक तकनीकों की मदद से बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर हैं। उन्हें 200 से 220 क्विंटल उत्पादन और 2 से 3 लाख रुपये आय की उम्मीद है। यह कहानी दर्शाती है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और योजनाओं का लाभ लें, तो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।
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